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-जिले में 24 तक चलेगा परिवार मिशन अभियान, होंगे कई तरह के कार्यक्रम
-अभियान के तहत लोगों को परिवार नियोजन के प्रति किया जा रहा जागरूक
भागलपुर, 14 सितंबर। परिवार मिशन अभियान के तहत बुधवार को सदर अस्पताल में परिवार नियोजन मेला लगाया गया। मेले का उद्घाटन एसीएमओ डॉ. अंजना कुमारी ने किया। मेले में कई तरह के स्टॉल लगे थे, जहां पर लोगों को परिवार नियोजन को लेकर जागरूक करने से लेकर अस्थायी सामग्री तक का वितरण किया गया। परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करने को लेकर मेले में स्टॉल लगे थे, जहां पर आने वाले लोगों की काउंसिलिंग की जा रही थी। मौके पर डीसीएम जफरूल इस्लाम, एमएनई अंश मिश्रा, अरबन कंसल्टेंट दयानंद मिश्रा, केयर इंडिया के पंकज मिश्रा, डॉ. शालिनी, डॉ. राजेश मिश्रा, पूनम टिग्गा, आलोक कुमार, मनीषा, विजय, शिल्पा, पीएसआई से नवीन कुमार, समीक्षा और काउंसिलर स्वर्णलता व वंदना मौजूद थीं। मालूम हो कि परिवार मिशन अभियान पांच सितंबर को शुरू हुआ है और यह 24 सितंबर तक चलेगा।
एसीएमओ डॉ. अंजना कुमारी ने बताया कि परिवार मिशन अभियान को दो चरणों में चलाया जाना था, जिसका पहला चरण समाप्त हो गया है। पहले चरण के तहत 05 से 11 सितंबर तक दंपति संपर्क सप्ताह चला। इस क्रम में 05 से 09 सितंबर पांच दिनों तक परिवार नियोजन के प्रति आमजनों को जागरूक करने के उद्देश्य से ई. रिक्शा (सारथी रथ) के माध्यम से राज्य स्वास्थ्य समिति के दिशा-निर्देश के अनुसार और स्थानीय स्तर पर तैयार रूट चार्ट के मुताबिक जिले के सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार किया गया। ई. रिक्शा पर संबंधित क्षेत्र की आशा फैसिलिटेटर ने प्रचार-प्रसार का काम किया। लोगों को गर्भनिरोधक गोली, कंडोम इत्यादि सामग्री बांटी गई। सोमवार से दूसरा चरण चल रहा है। इसी के तहत बुधवार को सदर अस्पताल में मेला लगाया गया। दूसरे चरण में महिलाओं का बंध्याकरण किया जाएगा। साथ ही पुरुष नसबंदी भी की जाएगी। इसे लेकर दंपति संपर्क का आयोजन हो चुका है। इस दौरान योग्य दंपतियों का चयन आशा कार्यकर्ताओं ने किया है। इनमें से कुछ लोगों का रजिस्ट्रेशन भी किया गया है ऑपरेशन के लिए। इसके अलावा लोगों को परिवार नियोजन की सामग्री भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
अस्थायी साधनों के इस्तेमाल करने से नहीं करें संकोचः एसीएमओ ने बताया कि अस्थायी साधनों के इस्तेमाल से परिवार नियोजन में मदद मिलती है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। इसलिए अस्थायी साधनों के इस्तेमाल में किसी तरह का संकोच नहीं करें। कंडोम, कॉपर-टी, अंतरा का उपयोग कर परिवार नियोजन करें। महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पहला बच्चा 20 साल के बाद ही पैदा करें। साथ दी दूसरे बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूर रखें। इससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है। साथ ही बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है, जिससे वह भविष्य में होने वाली किसी भी बीमारी से लड़ने में सक्षम होता है। दो बच्चे हो जाने के बाद महिला बंध्याकरण या फिर पुरुष नसबंदी करा सकते हैं। इसे लेकर लगातार कार्यक्रम चलते रहते हैं। कार्यक्रम के तहत सरकारी स्तर पर लोगों को तमाम सुविधाएं दी जाती हैं।

रिपोर्टर
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Dr. Rajesh Kumar