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वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रामीण विकास की क्रांतिकारी पहल

 

-डॉ प्रदीप कुमार वर्मा

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार कार्यक्रम सामाजिक-आर्थिक संरचना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये कमजोर परिवारों को आय सुरक्षा प्रदान करते हैं, साथ ही संपत्ति निर्माण, ग्राम विकास और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देते हैं। कृषि पर निर्भर बड़ी आबादी मौसमी बेरोजगारी और आय की अनिश्चितता से जूझती है। वर्ष 2006 में लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमएनआरईजीए) ने शुरुआती वर्षों में कुछ राहत दी, लेकिन कमजोर प्रशासन, भ्रष्टाचार और विकास-उन्मुख दृष्टिकोण की कमी ने इसके दीर्घकालिक प्रभाव को सीमित कर दिया।

एमएनआरईजीए (MGNREGA) में भ्रष्टाचार की कई घटनाएं मीडिया में सामने आईं। पंजाब में AAP विधायकों, सांसदों और स्थानीय नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जहां गरीबों के हक का पैसा लूटा गया। विशेष ऑडिट में 10,653 से अधिक मामले पकड़े गए। पंजाब में 2024-25 और 2025-26 में हजारों पंचायतों में सोशल ऑडिट नहीं हुए। झारखंड में घोटाले में 22 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई। इन मामलों में नकली जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और मशीनों का इस्तेमाल आम था, जिससे मजदूरों को काम और वेतन नहीं मिला। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि MNREGA (एमएनआरईजीए) भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया था।

इसके अलावा, 100 दिनों की गारंटी का वादा भी अधूरा रहा। लिबटेक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, केवल 7% ग्रामीण परिवारों को ही पूरे 100 दिनों का काम मिला। वर्ष 2022 में किसी भी राज्य ने सभी परिवारों को 100 दिनों का रोजगार नहीं दिया। आंध्र प्रदेश में औसतन केवल 51.6 दिन काम मिला, और मात्र 11% परिवारों ने 100 दिन पूरे किए। पंजाब में AAP सरकार तीन वर्षों में मजदूरों को 100 दिनों का काम नहीं दे सकी। कारण थे: बजट की कमी, प्रशासनिक कमियां और कृषि मौसम में मजदूरों की अनुपलब्धता। इन विफलताओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया।

इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने विकसित भारत - रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी राम जी) लागू किया। यह एमएनआरईजीए की जगह लेता है और ग्रामीण रोजगार को सतत विकास से जोड़ता है, जो विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ा है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में इसे पेश करते हुए कहा कि यह अधिनियम भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और विकास-उन्मुख रोजगार सुनिश्चित करेगा।

वीबी-जी राम जी के प्रमुख प्रावधान ग्रामीण भारत को सशक्त बनाते हैं। प्रति परिवार सालाना 125 दिनों की गारंटी दी गई है। कृषि मौसम में 60 दिनों तक कार्य विराम का प्रावधान किसानों की चिंताओं को दूर करता है। कार्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया: जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका अवसंरचना और आपदा तैयारी। योजना ग्राम सभा से शुरू होकर पीएम गति शक्ति और जीआईएस से एकीकृत होती है। तकनीक अनिवार्य: बायोमेट्रिक, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, एआई से धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। वेतन हर हफ्ते अनिवार्य होगी, वेतन में देरी पर मुआवजा मिलेगा। प्रशासनिक व्यय भी 9% तक बढ़ाया गया है।

वित्तीय व्यवस्था में केंद्र-राज्य अनुपात 60:40 (पूर्वोत्तर के लिए 90:10) है। तय बजट से अधिक खर्च राज्य वहन करेगा, लेकिन मांग-आधारित काम जारी रहेगी। कुल आवंटन में ₹17,000 करोड़ की वृद्धि से राज्यों को लाभ मिलेगा शासन में बहुस्तरीय निगरानी, हर छह महीने पर सोशल ऑडिट, डिजिटल शिकायत निवारण और CAG मानकों से ऑडिट से भ्रष्टाचार समाप्त होगा।

एमएनआरईजीए से तुलना में यह विकास-उन्मुख रोजगार, अनिवार्य पारदर्शिता और समयबद्ध वेतन सुरक्षा की ओर बदलाव है। उत्तर प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य इसे सक्रियता से अपना रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मनरेगा जैसा क़ानून जिसमें महात्मा गांधी का नाम भी शामिल है उसे हटाकर, सरकार महात्मा गांधी का अपमान कर रही है। जिसके जवाब में सरकार ने कहा कि महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं। गांधी जी भी गांवों की बेहतरी ही चाहते थे। तो नए बिल से भला उनका अपमान कैसे होगा? सरकार ने पूछा कि कांग्रेस सरकार के समय जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था। तो क्या ये उनका अपमान था?

ये भी सच है कि कांग्रेस की सरकार ने छत्तीसगढ़ में दीनदयाल उपाध्याय के नाम की सारी योजनाओं का नाम एक ही नोटिफिकेशन से बदल दिया था। राजस्थान में अटल नाम की योजना को भी बदला था। ऐसे कई और भी उदाहरण मिल जाएंगे। लेकिन वही कांग्रेस आज नाम बदलने को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। प्रचार-प्रसार के लिए संरचित ग्रामीण अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें प्रशिक्षण, ग्राम सभाएं और डिजिटल प्रसार शामिल हैं।

मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से वीबी-जी राम जी अधिनियम ग्रामीण रोजगार की पुनर्परिभाषा है। यह पारदर्शिता, विकास और जिम्मेदारी से ग्रामीण भारत को विकसित भारत @2047 का मजबूत आधार बनाता है।

-लेखक राज्य सभा के सांसद और झारखंड भाजपा के महामंत्री हैं।

रिपोर्टर

  • Aishwarya Sinha
    Aishwarya Sinha

    The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News

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