टीबी एक संक्रामक रोग है। यह एक से दूसरे लोगों में फैलता है। इसलिए टीबी हो जाने पर सतर्कता जरूरी है। इसलिए टीबी के मरीज घर के सदस्यों का ख्याल रखें। किसी के साथ बातचीत के वक्त मास्क का प्रयोग करते रहना चाहिए। साथ ही दो गज की दूरी का पालन अवश्य करते रहना चाहिए। घर के सदस्यों के साथ एक निश्चित दूरी बनाकर रहें। खासकर बच्चों के साथ। ऐसा करते रहने से टीबी के प्रसार पर रोक लगेगा और घर-परिवार के लोग भी सुरक्षित रहेंगे।
टीबी के मरीजों को थोड़ा जागरूक रहना चाहिए-
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा कहते हैं कि सतर्कता तो जरूरी है। टीबी के मरीजों को थोड़ा जागरूक रहना चाहिए। जागरूक रहेंगे तो टीबी का प्रसार दूसरे लोगों में नहीं होगा। किसी भी बीमारी में जागरूकता बहुत जरूरी है। यही बात टीबी पर भी लागू होता है। इसलिए टीबी मरीज इन बातों को नजरअंदाज नहीं करें। ऐसा सिर्फ इलाज चलते रहने के दौरान ही करना है। ठीक होने के बाद मरीज फिर से पुराने तरीके से अपना जीवन जी सकते हैं।
टीबी होने पर चिंतित नहीं हों, इसका इलाज संभव हैः डॉ. सिन्हा कहते हैं कि टीबी होने पर लोगों को चिंतित नहीं होना चाहिए। यह अब लाइलाज बीमारी नहीं रही। इसका इलाज संभव है। अगर टीबी के लक्षण दिखाई दे तो तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल जाएं, वहां पर आपकी जांच होगी। जांच में अगर टीबी की पुष्टि हो जाती है तो इलाज शुरू कर दें। दवा का सेवन नियमित तौर पर करें। बीच में दवा छोड़ने पर एमडीआर टीबी होने का खतरा रहता है। एमडीआर टीबी हो जाने पर दवा का सेवन ज्यादा दिनों तक करना पड़ेगा। इसलिए बीच में दवा नहीं छोड़ें। इससे आप जल्द ठीक हो जाएंगे।
शुरुआत में ही इलाज कराने पर जल्द मिलेगी राहतः डॉ. सिन्हा कहते हैं कि टीबी का शुरुआत में ही इलाज करा लेने पर जल्द राहत मिलती है। देरी से इलाज कराने पर ठीक होने में ज्यादा समय लगता है। टीबी की अगर पुष्टि हो जाती है तो छह महीने तक दवा का सेवन करने पर आमतौर पर लोग ठीक हो जाते हैं। कभी-कभी बीमारी की जटिलता होने से ज्यादा समय लग जाता है। किसी-किसी मामले में मरीज पहले भी ठीक हो जाते हैं। इसलिए टीबी की पुष्टि होने पर जल्द इलाज शुरू कर दें।
पौष्टिक आहार का करें सेवनः टीबी के मरीजों को पौष्टिक आहार का सेवन करते रहना चाहिए। आमलोगों को भी ऐसा करते रहना चाहिए। टीबी के मरीजों को तो सरकार की तरफ से निश्चय पोषण योजना के तहत जब तक दवा चलती है, तब तक पांच सौ रुपये प्रतिमाह की राशि भी दी जाती है। इसलिए अगर किसी को लगातार दो हफ्ते तक खांसी हो, शाम के वक्त पसीना अधिक आए, बलगम के साथ खून आए या फिर लगातार बुखार रहे तो नजदीकी अस्पताल जाकर जांच करवाएं। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल इलाज शुरू कर दें।
रिपोर्टर
Dr. Rajesh Kumar
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
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